डॉ आलोक चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

किशोर न्याय अधिनियम के आगे पूरा देश क्या न्यायालय तक विवश है और हो भी क्यों ना आखिर जब कानून के अनुसार एक नाबालिग को तीन साल से ज्यादा जेल में रख ही नहीं सकता तो देश में नारियों के लिए महान कार्य करने वालो की लिस्ट में याद किये जाने वाले निर्भया के जीवन की ऐसी तैसी करने वाले को कैसे अलग रखा जा सकता है | वो बात अलग है कि देश में ना जाने ऐसे कितने लोग वर्षो से जेलों में सड़ रहे है जिन पर आज तक आरोप ही नहीं तय हो पाया है | पर किशोर की बात अलग है क्योकि कल के वही तो इस देश के कर्णधार है | उन्ही से कल कर भविष्य तय होगा ( आखिर ऐसे ही लोग तो पूरी जिंदगी हस हस कर लोगो को बताएँगे अपनी ट्रेनिंग में कि कैसे निर्भया रो रही थी , चिल्ला रही थी और वो क्या क्या कर रहा था आखिर ऐसे ही कर्णधारों के लिए तो देश बना है ) लेकिन बेचारा शूरवीर किशोर क्या करें? वो तो सारा दोष संसद का है जो समय से कानून ही नहीं बना पाये | और बनाते कैसे आखिर भगवान् के घर देर है अंधेर थोड़ी है जो एक इतना महान काम करने वाले के लिए कानून में समय से संशोधन हो जाता और एक किशोर को उम्र कैद या फांसी हो जाती | कितना सुखद है ये सच की अंत में जीत सच की ही होती है।

अब ये मुझसे न पूछियेगा की क्या देश का सच यही है !!!! और आपको यह भी मालूम होगा सच परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं हो सकता पर कौन सा सत्य पराजित नहीं हुआ ?????क्या बलात्कार करना यह का सच है ???) पर संसद भी क्या करें उसको भी अपने देश से यहाँ की संस्कृति से प्रेम है | आखिर विरोधी या विपक्ष ये कैसे भूल सकता है कि देश की संस्कृति बनाये रखने में उसको सहयोग करना है और ये हमारे यह की संस्कृति में ही तो है कि सब्र का फल मीठा होता है और लीजिये विपक्ष ने पूरे स्तर में कार्यवाही नहीं चलने दी और बलात्कारी किशोर को ये दिखा दिया कि जिसका कोई नहीं होता उसका साथ ऊपर वाला देता है और आपसी लड़ाई और एक दूसरे को नीचे दिखाने ( इस देश में जितने भी आक्रमणकारी आये वो इस देश के लोगो की आपसी लड़ाई के कारण ही इस देश में अपने कदम जमा सके ) की प्राचीन संस्कृति को कायम रखते हुए हमने अंततः एक बलात्कारी ??????? माफ़ कीजिये इस देश के कारण धर भविष्य को बचा लिया | अब आप बताइये क्या देश की उस संसद का सम्मान नहीं होना चाहिए जिसके कारण देश का गौरव कल हमारे बीच होगा क्योकि वो बेचारा क्या करें और बेचारे संसद में बैठे लोग क्या करें ??? होइए वही जो राम रच राखा!!!!!!!!!!!!!!!!

क्या कोई बताएगा कि वो अदम्भय सहस वाले किशोर को देश के कानून ने बचा लिया या फिर हमने अपनी संस्कृति को बचा लिया !!!!!!!!!!!! क्योकि जहा चाह राह है वहाँ राह है पर ये चाहा किसने और ऐसी राह बनाई किसने ? पर हो कुछ भी ये मैं आप पर छोड़ता हूँ लेकिन ये तो पक्का हो गया कि इस देश में महिला का सम्मान होता है और ऐसे ही सम्मान को कोई और देश नहीं दिल सकता !! आइये गर्व करें अपने पर , अपने देश पर और इस बात की हमारे घर की बेटी बहन का कितना अभूतपूर्व सम्मान है !!!!!!!! चलिए सवागत करें किशोर का आखिर कोई मामूली काम थोड़े किया है उसने !!!!!!! करेंगे ना !!!!!!!!!! ( देश में व्यंग्य क्यों पैदा हो रहा है महिला का सम्मान कब होगा )

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