डॉ प्रमोद गुप्ता, एशोसिएट प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय.

लखनऊ। कोरोना को विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने महामारी घोषित किया है। पूरी दुनिया में मई 2020 तक लगभग 50 लाख लोग इससे प्रभावित हो चुके है। कोरोना से मरने वालों की संख्या लगभग 327821 अर्थात 6.56 प्रतिशत है। केवल अमेरिका में 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं। यह आंकड़ा कहां जाकर थमेगा कोई नहीं जानता। न ही इस पर कोई भविष्यवाणी की जा सकती है। यह सही है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रभावित लोगों की संख्या काफी कम है। भारत में अब तक 118000 से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। अमेरिका में कुल आबादी की 0.44 प्रतिशत, स्पेन में 0.58 पर्सेंट है रूस में 0.19 प्रतिशत है, यूके में 0. 34%, इटली में 0.37 प्रतिशत है चीन में 0.00058 प्रतिशत है तथा भारत में 0.06 प्रतिशत आबादी कोरोना से प्रभावित है। यूरोप अमेरिका स्पेन की तुलना में भारत में इसका प्रभाव कम देखने को मिला है।

कोविड़-19 का सकारात्मक प्रभाव

  • पर्यावरण

सुधी जनों आप जानते हैं की इस समय पर्यावरण प्रदूषण में कमी आई है। अकेले दिल्ली में प्रदूषण में चमत्कारिक गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही ध्वनी प्रदुषण कार्बनडाई आक्साईड, नाइट्रोजन और जहिरीली गैसों के उत्सर्जन में कमी के कारण पर्यावरण साफ, स्वच्छ औऱ जीवन जीने लायक बन गया है। मई के अंत तक इसमें और भी कमी आने की उम्मीद की जा रही है। मुंबई में PM2 लेवल में कमी हुई हैं। वायु प्रदूषण में कमी के कारण जीवन रोग रहित हो गया है। आपने देखा होगा कि हजारों की संख्या मेंं लाईनों में लगे मरीज अचानक गायब से हो गये है। साथ ही गंगा का पानी जो खरबों रुपए खर्च करने के बाद भी साफ नहीं हो पाई थी। लॉकडौन के दौरान लगभग 20 दिनों में ही गंगा स्वच्छ और निर्मल हो गई हैं।

  • आर्थिक प्रभाव

 

भारत के पास आर्थिक रूप से सुपर पावर बनने का एक सुनहरा अवसर अवश्य इंतजार कर रहा है। जहां चीन से पूरी दुनिया की औद्योगिक कल कारखाने पलायन करने की स्थिति में दिखाई पड़ रहे हैं। वहीं भारत में इसके पुनर्स्थापना की उम्मीद बढ़ गई है। अर्थात चीन को दंड स्वरूप वहां के अंतरराष्ट्रीय व्यापार औद्योगिक कल कारखाने बंद कर दिये जाते हैं। तो इसे भारत एक अवसर के रूप में स्वीकार कर सकता है। ऐसे में भारत आर्थिक रूप से सुपर पावर बन सकता है। आर्थिक समृद्धी केलिये ये जरूरी हैं कि इस अवसर को गम्भीरता से लिया जाये और सरकारों (राज्य सरकार) के सहयोग से एक ठोस पहल भारत सरकारको करनी चाहिये। यहां हम स्पष्ट कर दें कि पिछले अनुभव ये बताते हैं कि अधिकारीयों द्वारा यदि गम्भीरता से नही लिया गया तो इसका सम्यक परिणाम प्राप्त नही होगा।

  • अपराध में कमी

अपराध में कमी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो एनसीआरबी के अनुसार भारत में लाकडाउन के दौरान अपराध में कमी दर्ज की गई है। इस लाकडाउन के दौरान रेप, घरेलू हिंसा, चोरी, डकैती, हत्या तथा अन्य अपराधों में काफी कमी देखने को मिली है।

  • मृत्यु दर में कमी

भारत में मृत्यु दर 7.23 प्रतिशत 1000 आबादी पर हुआ करता था। लेकिन लाकडाउन के दौरान यह 3.23% प्रति हजार आबादी रह गया है। प्राकृतिक मृत्यु दर में कमी के साथ-साथ एक्सीडेंट, आकस्मिक मृत्यु दर में भी कमी देखने को मिली है। वही कन्या भ्रूण हत्या तथा मातृत्व मृत्यु दर में भी कमी देखने को मिली है।

  • ऑनलाइन स्किल्ड में वृद्धि

समाज का प्रत्येक व्यक्ति बुड्ढा बच्चा जवान पुरुष तथा महिला ऑनलाइन स्किल्ड में स्वतंत्र तथा निपुण होता जा रहा है। यूट्यूब फेसबुक इंस्टाग्राम व्हाट्सएप की मदद से लोग आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

  •  हाउस वाइफ की दक्षता में वृद्धि

लाकडाउन के दौरान रेस्टोरेंट तथा ढाबे में खाना खाना बंद है। लेकिन घर की महिलाएं आगे बढ़कर नित्य नए प्रयोगों के द्वारा अनेक वस्तुओं को बनाने में दक्षता प्राप्त कर रही हैं और ऑनलाइन तथा यूट्यूब के माध्यम से घर पर रोज नए नए पकवान बना जा रहे हैं। होटलो और रेस्टोरेंट्स की तरह खाना बनाने का प्यास हो रहे हैं। यह एक अभूतपूर्व परिवर्तन कहा जा सकता है।

  • संयुक्त परिवार की महत्ता

लाकडाउन के दौरान एक बात जो सामने निकल कर आ रही हैं कि संयुक्त परिवार इस प्रकार के आपदा में बड़ा सहयोगी होता हैं। जहां परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक है वहां व्यक्ति इंजॉय कर रहा था। एकाकी परिवार जिसे एकल परिवार भी कहते हैं। वे छोटे आकार में होते हैं। जिसके कारण डिप्रेशन अवसाद चिड़चिड़ापन ब्लड प्रेशर जैसे अनेक बीमारियों के चपेट में व्यक्ति फस रहा था।

कोविड-19 का नेगेटिव इंपैक्ट

मित्रों जहां अनेक अच्छाइयों को आपने देखा वही ऐसी घटनाएं घटित हुई जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती 100 वर्षों के अंतराल में विश्व का सबसे खतरनाक बीमारी कोरोना है। यह सामाजिक आर्थिक तथा मानवीय संकट है। जनसंख्या के सबसे कमजोर वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला अदृश्य वायरस ऐसे लोगों को शिकार बना लिया, जिसका कोई कसूर नहीं था। पूरी दुनिया बेरोजगारों की संख्या से पट गई। देश निर्धनता की ओर बढ़ रहा है।  प्रमुख व्यवसाय पर्यटन, होटल व्यापार बिल्कुल ठप पड़ गया।

सामाजिक दूरी की वजह से व्यक्ति एक दूसरे से दूर होता जा रहा है। सामाजिक दूरी शब्द शायद एक समाजशास्त्री की समझ में उपयुक्त शब्द नही है। यहां पर शारीरिक दूरी इस महामारी के संदर्भ में रखनी जरूरी है। मन से हम एक दूसरे के नजदीक रहते हैं और बिना नजदीक आए भी एक दूसरे से संपर्क रख सकते हैं। अनेक संचार माध्यमों से बहुत दूर-दूर के लोगों से सामाजिक रूप से आप प्रतिदिन जुड़े रहते हैं। इस प्रकार व्यक्ति इस अवधि में बहुत अवसाद का शिकार होता जा रहा है। जिसको वह अपनो से बात कर के सलाह मसवरा कर के दूर कर सकता है।

यह एक अलग प्रकार की बीमारी है। जो सामाजिक जीवन के लिए खतरनाक है। वैश्वीकरण के इस युग में स्थानीकरण का प्रयास बेहद चौंकाने वाला है। पूरी दुनिया अब किसी से मिलना नहीं चाहती। मानवता की रक्षा करना आज के समय का प्राथमिक उद्देश्य बन चुका है। इस प्रकार हम देख सकते हैं किस समाज में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। जो हमें दिखाई नहीं पड़ रहा है।  हम नजदीक भी हैं और एक दूसरे से बहुत दूर भी।

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