डॉ आलोक चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

देश के सभी प्रेस करने वालो को बधाई आप इसी तरह प्रेस करके मुड़े तुड़े कपड़ो को लोगो को देते रहिये ताकि उनको पहन कर लोग अच्छे दिखाई दे क्योकि आपमें इतनी ताकत कहा है कि आप समाज के लोगो को प्रेस करके उनके अंदर के तोड़ और मोड़ को सही कर सके और अगर आपने उनके ऊपर प्रेस का तेवर दिखाया तो आपका क्या हाल ऐसे लोग करेंगे वो आप जानते है इसी लिए आप पैसे लेकर सिर्फ कपडे ( ऊपरी आवरण सच्चाई दिखने की हिम्मत कहा है ) को सही करने में फसे है | सब कपडे और उस पर प्रेस के कमाल में ही उलझे है किसी को ये जानने की फुर्सत ही नहीं कि प्रेस का वास्तव में काफी उपयोग है पर प्रेस का प्रयोग करने की हिम्मत गरीब के लिए समाज के पास है ही नहीं क्योकि प्रेस उसी के पास हो सकता है जिसके पास पैसा हो , बिजली हो और इस देश में गरीब के पास ये दोनों नहीं है और इसी लिए प्रेस से काफी दूर है प्रेस और हो भी क्यों ना क्योकि प्रेस से कब किसको करेंट लग जाये और कौन उंसी चपेट में आ जाये किसी को नहीं मालूम | इसी लिए जब प्रेस के नजदीक जाइये तो ध्यान रखिये कही आप के दखल से प्रेस में कोई ऐसी स्थिति ना आ जाये कि वो आपको ही खत्मकर डाले | वैसे प्रेस भी कुछ कम दाम में खरीदे जा सकते है और कुछ काफी महंगे बिकते है | समाज में जिनके पास पैसा है ज्यादातर वही बड़े और महंगे प्रेस खरीद लेते है और मध्यम आमदनी वाले या तो प्रेस वालो पर विश्वास करके अपनी अमानत दे आते है या फिर अपनी औकात के अनुसार प्रेस खरीद कर जैसे तैसे अपने को समाज में दिखने का प्रयास करते है | गरीब के लिए तो प्रेस नाम ही बकवास है | क्या आपको मालूम है कि नेता अभिनेता के अपने प्रेस वाले होते है और जो उनके व्यक्तित्व को हमेशा निखारने में लगे रहते है और ऐसा दिखाने की कोशिश करते है मानो खददर कुर्ते के कड़क पन की तरह ही उनका भी जीवन बेदाग हो पर प्रेस वालो को ये नहीं पता कि सच्चाई प्रेस से नहीं लोगो को देख कर ही समझ में आ जाती है क्योकि मैल जो कुर्ते में बैठ गयी है वो प्रेस से नहीं मिटाया जा सकता है | उसको मिटने के लिए लोगो के हाथो का साथ ही चाहिए पर अब तो गंदे को भी प्रेस वाले अपनी प्रेस की गर्मी से इतना कड़क बना देते है कि काली मैल भी एक रंग जैसी ही दिखाई देती है और प्रेस वाले इसे अपनी कलाकारी और प्रस्तुत करने का तरीका बताते है लेकिन क्या प्रेस का यही काम था |

आप सभी प्रेस वालो को आज साधुवाद क्योकि आपने समाज को सिर्फ प्रेस के इर्द गिर्द रहना सीखा दिया काश उनको उस फटी बनियान भी दिखाते जो प्रेस के कड़क दार ऊपरी दिखावे में ना जाने क्यों समाज को सच्चाई से कोसो दूर ले जा रही है | पर आपको तो पैसे काममे से मतलब है अब प्रेस पैसा कमाने का अच्छा साधन है तो आप क्या करें आखिर बेरोजगारी के इस दौर में घूसखोरी के चलन में कम सेकम आप प्रेस से अपनी दो रोटी तो कमा ले रहे है और समाज में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे प्रेस की जरूरत न हो तो क्यों ना आप इसे मूल्यों और नैतिकता से जोड़ने के बजाये अपना व्यवसाय बना ले और बना क्या ले बना लिया है | प्रेस से कमाइए और खाइये और आपकी इसी मेहनत और लगन देख कर ही तो आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है | तो आप कीजिये प्रेस क्योकि समाज में कई मोड़ और तोड़ आ गए है | क्या आप आप समाज को प्रेस कर पाएंगे कभी ????????????? ( व्यंग्य )सभी प्रेस से जुड़े लोगो को प्रेस करने के लिए शुभकामना ..

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