डॉ दिलीप अग्निहोत्री

कोरोना के विरुद्ध जंग में सरकार और समाज दोनों को अपने अपने मोर्चे संभालने है। इसके दृष्टिगत स्वास्थ सेवाओं का विस्तार और उनको सुदृढ़ बनाना सरकार का दायित्व है। इसी प्रकार बचाव के दिशा निर्देशों पर समाज की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि जब तक कोविड की दवा या वैक्सीन नहीं बन जाती है,तब तक इसके संक्रमण से बचाव पर अमल करना अपरिहार्य है। इसके लिए मास्क, ग्लव्स,सैनिटाइजर और दो गज की दूरी आदि का पालन करना होगा।

यह सही है कि भारत में समय पर सही फैसले लिए गए। उससे अन्य देशों के मुकाबले भारत संभली हुई स्थिति में है। कुछ देशों को छोड़ दें तो केवल उत्तर प्रदेश की जनसंख्या अन्य देशों से अधिक है। इसका उल्लेख कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी ने भी किया था। इसके बाबजूद उत्तर प्रदेश के मुकाबले अन्य देशों का संकट बहुत अधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां उठाये गए कदमों के उल्लेख किया। कोरोना के प्रारंभिक चरण के एक दिन में मात्र बहत्तर टेस्ट करना संभव हुआ था। जबकि उसके ठीक चार महीने बाद प्रदेश में एक लाख छह हजार से अधिक टेस्ट किए गए हैं।
आरटीपीसीआर के माध्यम से राज्य में प्रतिदिन चालीस हजार से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। तब राष्ट्रीय स्तर पर टेस्ट के मामले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी छह प्रतिशत थी। यह अब बढ़कर पन्द्रह प्रतिशत हो गई है। प्रदेश के सभी जनपदों के जिला चिकित्सालयों तथा सभी राजकीय मेडिकल काॅलेजों में टूनेट मशीनों के माध्यम से टेस्ट किए जा रहे हैं। वर्तमान में रैपिड एन्टीजन किट के माध्यम से प्रतिदिन छप्पन हजार टेस्ट हो रहे हैं। इन्हें बढ़ाकर प्रतिदिन एक लाख किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों, औद्योगिक संस्थाओं आदि में कोविड हेल्प डेस्क स्थापित करायी गयी है। प्रदेश की उनसठ हजार ग्राम पंचायतों और बारह हजार नगरीय निकाय के वाॅर्डों में पल्स आक्सीमीटर इन्फ्ररेड थर्मामीटर,ग्लव्स,मास्क, सैनिटाइजर से युक्त टीमें डोर टू डोर सर्वे के लिए लगायी गयी हैं। इन टीमों द्वारा कोरोना संक्रमण के संदिग्ध व्यक्तियों का रैपिड एन्टीजन टेस्ट किया जा रहा है।

इसके पहले नरेन्द्र मोदी ने कोविड टेस्टिंग के लिए आईसीएमआर की तीन नयी उच्च क्षमता की टेस्टिंग सुविधाओं का वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोकार्पण किया। देश मे कोरोना स्पेसिफिक हेल्थ सिस्टम के निर्माण का कारगर प्रयास किया गया। इसके लिए शुरू में ही पन्द्रह हजार करोड़ रुपए आइसोलेशन सेण्टर, कोविड अस्पताल, टेस्टिंग आदि सुविधाओं के लिए दिए गए। इस देश में ग्यारह हजार से अधिक कोविड फैसिलिटी सेण्टर तथा ग्यारह लाख से अधिक आइसोलेशन सेण्टर उपलब्ध हैं। कोरोना के शुरुआती चरण में मात्र एक टेस्टिंग लैब थी, आज तेरह सौ से अधिक प्रयोगशालाएं क्रियाशील हैं। इस समय पांच लाख से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। इन्हें बढ़ाकर दस लाख करने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती दौर में हमारे यहां एक भी पीपीई किट का निर्माण नहीं होता था। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पीपीई किट का निर्माता है। देश में बारह सौ से ज्यादा निर्माता प्रतिदिन पांच लाख से अधिक पीपीई किट बना रहे हैं। पहले एन नाइंटी फाइव मास्क आयात करना पड़ता था। आज देश में प्रतिदिन तीन लाख से अधिक ऐसे मास्क बनाए जाते हैं। इस समय भारत प्रतिवर्ष तीन लाख वेण्टीलेटर बनाने में सक्षम है।

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