डॉ दिलीप अग्निहोत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा को अवसर बनाने का मंसूबा बनाया है। कोरोना से मुकाबले की उनकी कार्ययोजना इसका प्रमाण है। लाखों प्रवासी श्रमिकों का उत्तर प्रदेश में पहुंचना अप्रत्याशित था। दिल्ली,पंजाब,राजस्थान और महाराष्ट्र से यह श्रमिक पलायन कर रहे थे। कोरोना के दृष्टिगत यह बड़ी समस्या था। इन श्रमिकों के साथ उन स्थानों के निवासियों को कोरोना से सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती थी। कांग्रेस को लगा होगा कि योगी आदित्यनाथ इस मुसीबत का मुकाबला नहीं कर सकेंगे। इसे उत्तर प्रदेश में अपनी जड़ जमाने का अवसर माना गया। इस मसले पर प्रियंका गांधी ने बसों की पटकथा के साथ धमाकेदार इंट्री का प्रयास किया था। लेकिन नीयत ठीक ना हो तो फजीहत झेलनी पड़ती है। इस प्रकरण में भी यही देखा गया।

विपक्ष के नेताओं ने गैर भाजपा सरकार की विफलता पर कुछ नहीं कहा। यदि ये सरकारें श्रमिकों के भरण पोषण की व्यवस्था करती तो इनको इस मुसीबत में पलायन ना करना पड़ता। योगी आदित्यनाथ ने अपनी मुस्तैदी से विपक्ष की इस मुहिम की हवा निकाल दी। उन्होंने इन श्रमिकों को सुरक्षित व सम्मानजनक ढंग से घर पहुंचाया,उनको आर्थिक सहायता व राशन किट प्रदान की गई। अगले चरण में इनको रोजगार देने की भी व्यवस्था की गई। इसके लिए आयोग भी बनाया जा रहा है। कामगार श्रमिक सेवायोजन एवं रोजगार कल्याण आयोग के माध्यम से यह योजना परवान चढ़ेगी।

अब तक सोलह लाख से अधिक कामगारों व श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम पूरा हो चुका है। यह कार्य निरंतर प्रगति पर है। यह संख्या बढ़ रही है।

इनको नौकरी,दुकान,घर देने के लिए सरकार अनेक रियायतें उपलब्ध कराएगी। स्किलिंग के जरिए जनपद स्तर पर ही सेवायोजन कार्यालय के माध्यम से रोजगार या नौकरी की व्यवस्था की जाएगी। श्रमिकों कामगारों के लिए सस्ते और बेहतर डोरमेट्री और सस्ती व दुकानें के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए सरकारी भवनों व सरकारी भूमि चिन्हित को चिन्हित किया जा रहा है।

स्वरोजगार हेतु बैंक से सहायता दिलाने में भी सरकार अपनी भूमिका का निर्वाह करेगी। फिलहाल इन श्रमिकों को हजार रुपए का भरण पोषण भत्ता प्रदान किया जा रहा है।इनके लिए खाद्यान्न की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु इनके नए राशन कार्ड भी बनाए जा रहे है। एक जून से खाद्यान्न वितरण अभियान का अगला चरण शुरू होगा। इसकी तैयारियां तेजी से की जा रही है।मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से कामगारों के साथ संवाद किया जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हेतु भी कदम उठाए जा रहे है। श्रमिकों को उनकी दक्षता के अनुरूप समायोजित करने के लिए सभी प्रकार के उद्योगों का सर्वे कराया जा रहा है।

दुग्ध समितियों को सक्रिय रखने के प्रयास चल रहे है। मुख्यमंत्री ने सभी कोविड अस्पतालों को निरन्तर सक्रिय रखने के निर्देश दिए। इन चिकित्सालयों में पीपीई किट,एन नाइंटिफाइव मास्क,ग्लव्स तथा सेनिटाइजर सहित सभी बचाव उपकरणों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित रखनी होगी। मेडिकल इंफेक्शन को रोकने के लिए डाॅक्टरों सहित सभी चिकित्साकर्मियों का प्रशिक्षण कार्य निरन्तर जारी रहेगा। तीनों लेवल के कोविड चिकित्सालयों में बेड की संख्या को इस माह के अन्त तक बढ़ाकर एक लाख बेड कर दिया जाएगा। प्रत्येक जनपद में एक टेस्टिंग लैब की स्थापना की जा रही है। प्रदेश के बड़े चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश में नियमानुसार पुनः कार्य प्रारंभ हो रहा है। आठ सौ से अधिक बड़े उद्योग में पैसठ हजार कामगार व श्रमिक काम कर रहे हैं।

लघु एवं मध्यम श्रेणी की करीब तीन लाख हजार उद्योग में करीब तेईस लाख श्रमिक व कामगार काम कर रहे हैं। सूक्ष्म श्रेणी की पच्छत्तर उद्योग में सवा दो लाख श्रमिक व कामगार काम कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने अन्य राज्यों से प्रदेश आने के इच्छुक कामगारों श्रमिकों की सूची प्राप्त करने के लिए सम्बन्धित राज्य सरकारों को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार सभी श्रमिकों की सुरक्षित प्रदेश वापसी के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी सम्मानजनक व सुरक्षित वापसी के लिए केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार ने निशुल्क ट्रेन तथा बस की व्यवस्था की है। सभी कामगारों व श्रमिकों की स्क्रीनिंग करते आवश्यकतानुसार क्वारंटीन सेन्टर अथवा होम क्वारंटीन के लिए घर भेजा जा रहा है। सभी जरूरतमंदों को कम्युनिटी किचन के माध्यम से फूड पैकेट सुलभ कराए जा रहे है। जाहिर है कि योगी आदित्यनाथ श्रमिकों के के साथ साथ अन्य सभी वर्गों के लोगों को सहूलियत देने का प्रयास कर रहे है।

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