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Total Samachar गायों का कत्ल कर बनाये जा रहे हैं सैकड़ों प्रोजक्ट

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गायों का कत्ल कर बनाये जा रहे हैं सैकड़ों प्रोजक्ट। आईये जानते है…

 

 

शायद आप को नही मालूम होगा कि हम अनजाने कितनी ऐसी वस्तुओं का रोजाना प्रयोग करते हैं जिसमें किसी न किसी बेगुनाह जानवर के खून तेल चर्बी मिलाया गया होता हैं। आज हम आपको बतायेगें की कैसे हमारे ही देश में कई बेगुनाह जानवर के साथ साथ जिसे हमारी देश मां का दर्जा दिया गया हैं उस गऊ माता के चर्बी खून औऱ तेल से बने कई प्रोडक्ट धड़ल्ले से बिक रहे हैं। जिसे हम जाने एंजाने में रोजाना इस्तेमाल भी करते हैं। टोटल समाचार की टीम ने देश के कई कोने में जा कर ये अहम जानकारी प्राप्त की हैं। जिसे आप पढ़ कर हैरान हो जायेगे। टोटल समाचार ने बीड़ा ऊठाया हैं कि जो हमारे देश में गुपचुपतरिके से हो रहा हैं या फिर जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं उसे आप तक पहुचाया जा सके। पेश हैं आप सब के लिये टोटल समाचार की ये एक्सक्लूसिव खबर।

 

कत्लखानों में कौन कौन से जानवरों का किया जाता हैं कत्ल

 

 

 

हमारे देश अब तक 3600 से ज्यादा ऐसे कत्लखआने हैं जिसे सरकार ने पशुओं को काटने का लाईसेंस दे रखा हैं। यही नही देश में 50000 से ज्यादा कत्लखाने ऐसे भी हैं जो गुपचुप तरिके से चलाये जा रहे हैं। यानि कि वो गैरकानूनी तरिके से चल रहे हैं। जिन पर आरोप लगातर ये लगते रहते हैं कि ये अधिकारीयों के मिलीभगत से चल रहे हैं। ये जान कर आपको हैरानी होगी कि हर साल देश में 5 करोड़ से ज्यादा पशुओं को काटा जाता हैं। जिसे यूं समझिये कि कत्ल किया जाता हैं। जिसमें गाय, भैस, सुअर, बकरा, बकरी, मुर्गा, ऊटं, और न जाने कितनी प्रजाति की पक्षियां व मछली आदि शामिल हैं। मछली और मुर्गीया कितनी मारी जाती हैं इसका अब तक कोई रिकार्ड नही मिल सका हैं।

सबसे पहले तो ये सारे पशुओं को मारने के बाद उनके मांस को बेचा जाता हैं। जिसे मासांहारी लोग खाते हैं। उसके बाद जो कुछ बचता हैं उसे निकलने वाल चर्बी और खून होता हैं। जो कि बहुत महगें बिकते हैं। बस निर्भर उस पर किया जाता हैं कि किस जानवर का हैं।

 

क्यों किया जाता हैं गाय औऱ अन्य पशुओं का कत्ल

 

 

गाय और गाय जैसे जानवरो आदि का कत्ल होता है। तो 5 वस्तुए निकलती है। कत्लखाने में गाय, भैंस, बछड़ा, बकरी, ऊंट आदि काटे जाते है। तो इनसे जितना मांस उतपन होता है वो बिकता है। चर्बी का तेल बिकता है। खून बिकता है हडडिया और चमड़ा बिकता है। पशुओं के कत्ल के बाद उनके शरिर से निकलने वाली इन पाँच वस्तुओ का भरपूर प्रयोग है और एक बहुत बड़ा बाजार है इस देश मे।

 

गाय और अन्य पशुओं के अंग और खून से बनाये जाते हैं कई प्रोडक्ट

 

सबसे पहले अगर गाय का कत्ल किया गया तो उसके मांस के अलावा जो तेल निकलता हैं उसे Beef Tallow कहते हैं और जो तेल सुअर से निकलता हैं उसे Pork Tallow कहते हैं। इन तेलों का सबसे ज्यादा उपयोग चेहरे पर लगाने वाली क्रिम बनाने में किया जाता हैं।

ये बात हम ऐसे ही नही कह रहे हैं बल्कि मद्रास हाईकोर्ट में श्री राजीव दीक्षित जी ने चेहरे पर लगाने वाली क्रीम बनाने वाली विदेशी कंपनी के खिलाफ किया था। जिस केश को उन्होने जीता था। जिसमे कंपनी ने खुद माना था कि हम अपने प्रोडक्ट में सूअर की चर्बी का तेल मिलाते हैं।

अब हम जो बताने जा रहे हैं वो औऱ भी भयावह हैं। अब मांस तेल के बाद जानकारी देने की बारी हैं पशुओं के खून के बारे में। कत्लखाने में गाय या फिर दूसरे पशुओं को उल्टा टांगा जाता हैंऔर फिर उनकी निर्मम हत्या कर दी जाती हैं। नीचे रखे ड्रम में उनका खून इकठ्ठा कर लिया जाता हैं। जिसे दवा बनाने वाली कम्पनीयों को बेच दिया जाता हैं। गाय के अलावा कई पशुओं का खून कई तरह की दवा बनाने में किया जाता हैं। खासतौर से गाय के शरीर से निकला हुआ खून ,मछ्ली के शरीर से निकला हुआ खून, बैल ,बछड़ा बछड़ी के शरीर से निकला हुआ खून तो खून बढ़ाने वाली दवा बनाने में किया जाता हैं।   जब किसी मरिज को खून की कमी होती हैं तो डाकटर इन्ही पशुओं के खुन से बनी दवाईयों को खाने की सलाह देते हैं।

अब तक तो आप लोगों कई हैरान करने वाली जानकारी ले ली। अब एक औऱ जानकारी हम आप को बताने जा रहे हैं। कि इन पशुओं का कत्ल करने के बाद इन पशुओं के खून का इस्तेमाल दवा के साथ साथ महिलाओं के सौन्दर्य में इस्तेमाल में आने वाली एक खास वस्तु में भी प्रयोग किया जाता हैं। वो हैं Lipstick। महिलाये अपने सौदर्य को बढ़ाने के लिये अपने होठों पर जो Lipstick लगाती है उसमें भी पशुओं का खून मिलाया जाता हैं। असल में मरे हुए पशुओं के खून का प्रयोग चाय बनाने मे बहुत सी कंपनिया करती है।
अब चाय तो पोधे से प्राप्त होती है और चाय के पोधे का size उतना ही होता है जितना गेहूं के पोधे का होता है। उसमे पत्तिया होती है उनको तोड़ा जाता है और फिर उसे सुखाते हैं। तो पत्तियों को सूखाकर पैकेट मे बंद कर बेचा जाता हैं ! और पत्तियो को नीचे का जो टूट कर गिरता है जिसे डेंटरल कहते हैं। लेकिन ये चाय नहीं है। चाय तो वो ऊपर की पत्ती है। तो फिर चाय बनाने वाली कम्पनियां क्या करते है इसको चाय जैसा बनाया जाता है। अगर हम उस नीचले हिस्से को सूखा कर पानी मे डाले तो चाय जैसा रंग नहीं आता। तो कुछ चाय की पत्ती बनाने वाली विदेशी कम्पनियां जानवरो के शरीर से निकला हुआ खून को इसमें डेंटरल में मिलकर सूखा कर डिब्बे मे बंद कर बेचती है। तकनीकी भाषा मे इसे tea dust कहते है। इसके अलावा कुछ कंपनिया nail polish बनाने ने प्रयोग करती है।

आईये अब आगे का खेल हम आपको बताते हैं। मांस,तेल ,खून ,के बाद कत्लखानों मे पशुओ की जो हड्डीयां निकलती है उसका प्रयोग toothpaste बनाने वाली कई कंपनिया करती है। सबसे पहले जानवरो कि हड्डियों को इकठ्ठा किया जाता है। उसे सुखाया जाता है फिर एक मशीन आती है bone crasher मे इसको डालकर इसका पाउडर बनाया जाता है और कंपनियो को बेचा जाता है ! shaving cream बनाने वाली काफी कंपनिया भी इसका प्रयोग करती हैं। और आजकल इन हड्डियों का एक नया प्रयोग भी होने लगा है टेल्कम powder बनाने मे। नहाने के बाद जो हम लोग पाउडर लागाते हैं उसमे इसका प्रयोग होता है। क्यूंकि ये थोड़ा सस्ता पड़ता है। वैसे टेल्कम powder पत्थर से बनता है। जो कि 60 से 70 रुपए किलो मिलता है। जबकि गाय की हड्डियों का powder 25 से 30 रुपए मिल जाता है। इस लिए बहुत सी कंपनिया हड्डियों से बने powder का प्रयोग करती हैं।

इन सबके बाद गाय ऊपर की जो चमड़ी होती है उसका सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है cricket के ball बनाने मे। लाल रंग की ball होती है आज कल सफ़ेद रंग मे भी आती है। जो गाय की चमड़ी से बनाई जाती है। गाय के बछड़े की चमड़ी का प्रयोग ज्यादा होता है ball बनाने मे। दूसरी एक ball होती है foot ball।  cricket ball तो छोटी होती है पर foot ball बड़ी होती है इसमे और ज्यादा प्रयोग होता है गाय के चमड़े का।

आजकल और एक उद्योग मे इस चमड़े का बहुत प्रयोग हो रहा है। जूते चप्पल बनाने मे। अगर आप बाजार से कोई ऐसा जूता चप्पल खरीदते है। जो चमड़े का है और बहुत ही soft है तो वो 100 % गाय के बछड़े के चमड़े का बना होता हैं और अगर hard है तो ऊंट और घोड़े के चमड़े का। इसके इलवा चमड़े के प्रयोग पर्स, बेल्ट जो बांधते है उसमें भी होता हैं।  इसके इलवा आजकल सजावट के समान ने इन का प्रयोग किया जाता है।

इसके अतिरिक्त गाय के शरीर के अंदर के कुछ भाग है। उनका भी बहुत प्रयोग होता है। जैसे गाय मे बड़ी आंत होती है। जैसे हमारे शरीर मे होती है। ऐसे गाय के शरीर मे होती है। तो जब गाय के काटा जाता है ! तो बड़ी आंत अलग से निकली जाती है और इसको पीस कर gelatin बनाई जाती है !जिसका बहुत ज्यादा प्रयोग आइसक्रीम, चोकोलेट, कैप्सूल आदि में किया जाता है।

इसके इलवा Maggi, Pizza, Burger, Hotdog , Chawmin के base material बनाने मे भरपूर होता है और एक jelly आती red orange color की उसमे gelatin का बहुत प्रयोग होता है।

आजकल जिलेटिन का उपयोग साबूदाना में होने लगा है। जो हम उपवास मे खाते है। तो ये सब वस्तुएं जो जानवरो के कत्ल के बाद बनाई जाती है और हम जाने अनजाने मे इन का प्रयोग अपने जीवन मे कर रहे है। कुछ लोग अपने आप को 100 टका हिन्दू कहते है। शाकाहारी कहते है और कहीं न कहीं इस मांस का प्रयोग कर रहे है। अपना धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं। तो आप इन सबसे बचे और अपना धर्म भ्रष्ट होने से बचाये।  एक बात हमेशा याद रखे टीवी पर देखाये जाने वाले विज्ञापन (ads) को देख अपने घर में कोई वस्तु न लाये इनमे ही सबसे बड़ा धोखा है। आप अपने दिमाग से काम ले और इन सब चीजों को लेने बचे। क्यूंकि विज्ञापन उनी वस्तुओं का दिखाया जाता है जिनमे कोई क्वाल्टी नहीं होती। देशी गाय का घी बिना विज्ञापन के बिकता है नीम का दातुन बिना विज्ञापन के बिकता है गन्ने का रस बिना विज्ञापन के बिकता है।

विज्ञापन का सिद्धांत है गंजे आदमी को भी कघा बेच दो। एक ही बात को बार-बार, बार-बार दिखाकर आपका brain wash करना। ताकि आप सुन सुन कर एक दिन उसे अपने घर मे उठा लाये।

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