6 जून 2020 को समाजशास्त्र विभाग, श्री जे.एन.एम. पी.जी. कॉलेज द्वारा “Revisiting the Social Development in Pendamic Situation” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन सम्पन्न किया गया। वेबिनार कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर एस डी शर्मा द्वारा समस्त विद्धवतजनों के स्वागत संबोधन से प्रारंभ हुआ। वेबिनार में प्रमुख वक्ता के रूप में प्रोफेसर परमजीत सिंह जज वर्तमान अध्यक्ष भारतीय समाजशास्त्र परिषद, प्रोफेसर आनंद कुमार जे एन यू, भूतपूर्व अध्यक्ष भारतीय समाजशास्त्र परिषद , प्रोo आर इंदिरा भूतपूर्व अध्यक्ष भारतीय समाजशास्त्र परिषद ,प्रो० ए०के० पाण्डेय बी एच यू और प्रोफेसर डी०आर० साहू लखनऊ विविo एवं भूतपूर्व सचिव भारतीय समाजशास्त्र परिषद ,ने वेबिनार में विकास से संबंधित समाजशास्त्रीय विचार प्रस्तुत किये।

प्रोo परमजीत सिंह जज मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचारों को रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक विकास हेतु एक नए मॉडल को अपनाने की जरूरत हैं। उन्होंने सभी का ध्यान व्याप्त सामाजिक असमानता पर आकर्षित किया और यह भी स्पष्ट करते हैं कि वह समाज ज्यादा अच्छा है जिसमें हमे कम असमानताएं देखने को मिलती है।

प्रोफेसर आनन्द कुमार ने सामाजिक विकास पर विचार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि आज हम जिस विकास की चर्चा करते हैं, वह टिकाऊ नहीं रहा पर्यावरण प्रदूषण, गरीबी और असुरक्षा जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आज हम जिस महामारी की मार झेल रहे हैं यह वैश्वीकरण के दुष्परिणाम के रूप में सामने आ रहा है और इससे समूचा विश्व प्रभावित हुआ है। प्रोफेसर आनन्द कुमार ने कहा कि भारत का संकट यह हैं कि लोग लोकतंत्र और पूंजीवाद में अर्न्तविरोध के कारण स्थितीयां बिगड़ गई हैं। बाहर के देशों में पूंजीवाद लोकतंत्र का सहयोग करता हैं। जब कि भारत में धनबल से लोकतंत्र खड़ा होता हैं।

प्रोफेसर इंद्रा ने महिलाओं की समस्यायों और लैंगिक असमानता के मुद्दों पर बात किया और स्पष्ट किया कि इस महामारी के काल में महिलाएं स्वयं को ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रही है अर्थात सभी घर पर सुरक्षित नही है। प्रो. इंद्रा जी ने कहा संयुक्त परिवार में पारिवारीक हिंसा नही होती लेकिन अर्वन कल्चर में एकल परिवार बढ़ने के कारण परिवारीक हिंसा ज्यादा हो रही हैं। ऐसे में महिलाओं के लिये घर असुरक्षित स्थान हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत हैं।

प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने सामाजिक विकास को लेकर स्पष्ट किया कि भारत में सामाजिक विकास के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य ,शिक्षा और गरीबी को केंद्र में रखकर योजनाओं का निर्माण करना होगा। रोजगार को महत्व देना होगा। इसके साथ ही योजनाओं के विकास के केंद्र में गांव को रखना होगा।

डॉ विनोद चंद्रा

वेबिनार के संयोजक डॉ विनोद चंद्रा ने भी विकास के समाजशास्त्रीय विचार रखते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में यह आवश्यक है कि हम विकास के लक्ष्यों HDI और MDG पर फिर से विचार करेगें। यह सच है कि विकाश की दिशा गांव से शहरों की ओर होनी चाहिये क्यों कि इस आपदा में सबसे अधिक परेशानी गरीब एवं निम्न मध्यम वर्ग के सामने खड़ी हुई जो प्रतिदिन कमाते थे और गुजारा करते थे। असंगठिक क्षेत्र के श्रमिक असुरक्षा की आशंका से हमेशा भयाक्रांत हैं। इस भयग्रस्त समाज के बारे में सोचना जरूरी हैं। अब विकास के नए मापदंडों और लक्ष्यों का निर्धारण किया जाना चाहिये।

 

इस वेबिनार में 289 प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिनमें प्रो. मानवेन्द्र सिंह, डॉ ध्रुव कुमार त्रिपाठी, डॉ तारा सिंह, डॉ रितू घोष, अंजू त्रिपाठी, डॉ विजय वर्मा, डॉ ज्ञानेन्द्र सिंह सहित देश के विभिन्न राज्यों कर्नाटक केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, उड़ीसा, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विद्वान थे। विनोद चंद्र ने वेबिनार के अंत मे सभी का आभार व्यक्त किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here