डॉ दिलीप अग्निहोत्री

भारतीय संविधान में संघात्मक शासन व्यवस्था का प्रावधन किया गया। यह अपेक्षा की गई कि राष्ट्र हित मे केंद्र व राज्य परस्पर सहयोग की भावना से कार्य करेंगे। अलग अलग पार्टियों की सरकार होने के बाद भी यह आदर्श व्यवस्था में अंतर नहीं होना चाहिए। ये बात अलग है कि केंद्र व राज्यों के बीच टकराव भी होते रहे है। किंतु कोरोना संकट के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों को साथ लेकर चलने का कारगर प्रयास किया है। इस अवधि में वह समय समय पर राज्यों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग संवाद करते रहे है। इसमें वह आपदा राहत कार्यों पर विचार करते है। बिना किसी भेदभाव के राज्यों को पर्याप्त सहायता का निर्णय लिया जाता है। ममता बनर्जी,कांग्रेस व उसके सहयोग से मुख्यमंत्री बने कतिपय अपवाद छोड़ दें,तो सभी राज्यों ने सहयोगी संघवाद का ही परिचय दिया है। यह दृश्य पिछले दिनों चीन के साथ हुए हिंसक तनाव के समय भी देखा गया। इसमें तो ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार को समर्थन दिया था। केवल कांग्रेस ही सरकार पर हमला बोल रही थी। सहयोगी संघवाद के क्रम में नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से संवाद किया। वहां की स्थिति पर विचार विमर्श किया। अपेक्षित सहायता का विश्वास दिलाया। बाढ़ के अलावा उन्होंने कोरोना की स्थिति व राहत कार्यो पर चर्चा की। उन्होंने वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से बाढ़ प्रभावित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ विचार विमर्श किया। इनमें उत्तर प्रदेश,असम, बिहार,महाराष्‍ट्र,केरल, कर्नाटक शामिल हुए। रक्षा मंत्री,स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, दोनों ही गृह राज्‍य मंत्री और संबंधित केन्‍द्रीय मंत्रालयों एवं संगठनों के वरिष्‍ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत मौसम विभाग और केन्‍द्रीय जल आयोग बेहतर व उपयोगी बाढ़ पूर्वानुमान लगाने के लिए ठोस प्रयास करते रहे हैं। ये एजेंसियां बाढ़ के क्षेत्रों में पूर्वानुमान लगाने के लिए भी प्रयास कर रही हैं। पूर्वानुमान को बेहतर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जा रहा है पूर्वानुमान के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को समय पर नदी के किनारे टूटने,बाढ़ के स्तर,बिजली गिरने के बारे में समय पर चेतावनी जारी हो सके। यह भी कहा कि कोरोना को ध्यान में रखते हुए राज्‍यों को सभी सावधानियां सुनिश्चित करनी चाहिए। इस संबंध में वरिष्‍ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए। इस ऑनलाइन बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत कार्यों से प्रधानमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बाढ़ राहत कार्यो की जानकारी दी,साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमित व उससे स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या भी बताई। करीब सवा लाख पीड़ितों में से अस्सी हजार से अधिक लोग पूर्ण उपचारित हुए है। करीब बीस हजार लोग होम आइसोलेशन में है। प्रत्येक जनपद में इण्टीग्रेटेड कमाण्ड एवं कन्ट्रोल सेण्टर स्थापित कर कोविड प्रबन्धन की समस्त कार्यवाही संचालित की जा रही है। प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों, सरकारी कार्यालयों व उद्योगों में करीब बाँसठ हजार कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है।
जुलाई के पहले पखवारे में अस्सी हजार से अधिक टीमों के माध्यम से विशेष कोविड सर्विलांस अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब इक्कीड करोड़ व्यक्तियों का सर्वेक्षण किया गया। करीब पौने दो लाख लक्षण युक्त व्यक्तियों को सूचीबद्ध कर कोविड की जाँच कराई गई। प्रदेश में स्थापित समस्त कोविड हैल्प डेस्क पर एवं सर्विलांस टीमों को एक लाख से अधिक पल्स आक्सीमीटर एवं इन्फ्रारेड थर्मामीटर उपलब्ध कराए गए हैं। निरन्तर सर्विलांस हेतु सत्तर हजार से अधिक टीमों का गठन कर क्रियाशील किया गया।

अब तक करीब सवा आठ करोड़ व्यक्तियों को बचाव के उपाय में संवेदीकृत किया गया। पच्चीसी हजार लक्षण ग्रस्त व्यक्तियों को चिन्हित कर उनकी टेस्टिंग की कार्यवाही की गई। प्रदेश में लेवल वन के करीब सवा लाख, लेवल टू के करीब सोलह हजार एवं लेवल थ्री के सवा बारह हजार बेड स्थापित किए गए हैं। इनमें से चार हजार से अधिक बेड पर आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। इस माह के अन्त तक बढ़ाकर आठ हजार तक करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश में अद्यतन कुल एक सौ बीस सरकारी लैबों एवं उनतालीस निजी लैब द्वारा कोविड संक्रमण की जाँच की जा रही है। जिनमें से कुल तैतीस सरकारी लैब में आरटीपीसीआर जाँच की सुविधा स्थापित की गई है। प्रदेश के जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में एक सौ पन्द्रह ट्रूनेट मशीन स्थापित कर त्वरित जाँच की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में विगत पन्द्रह दिनों से प्रतिदिन लगभग एक लाख व्यक्तियों की जाँच की जा रही है,जो सम्पूर्ण देश में सर्वाधिक है। योगी ने कहा कि प्रदेश में अब आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। गत वर्ष जुलाई माह में करीब ग्यारह हजार करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई थी। प्रदेश में सूक्ष्म,लघु,मध्यम एवं वृहद श्रेणी की कुल कार्यरत इकाइयों में पचास लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। आत्मनिर्भर पैकेज के अन्तर्गत ऑनलाइन ऋण वितरण कार्यक्रम आयोजित कर नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय ऋण स्वीकृत कर वितरित किए गए। इससे लगभग तेरह लाख नए रोजगारों का सृजन हुआ है। मनरेगा के अन्तर्गत अब तक करीब बीस करोड़ मानव दिवस का सृजन करते हुए चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का मानदेय भुगतान किया गया है। जो देश में सर्वाधिक है। आरोग्य सेतु एप उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक सवा दो करोड़ डाउनलोड हुए हैं। वर्तमान में आरटीपीसीआर टेस्ट हेतु रिएजेन्ट व किट भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योगी ने इस व्यवस्था को आगे भी जारी रखने का आग्रह किया।

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