मुम्बई से वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश सिंह की रिपोर्ट..

ये तस्वीर,ये वीडियो बहुत कुछ कहती है

कल तक जो मुम्बई में रोजी रोटी कमाने आये थे। मुम्बई में गणेशोत्सव त्योहार पर गणपति बप्पा की मूर्ति को अपने सर पर बिठाकर पंडालो,घरो में स्थापित कर रहे थे वे लोग यूँ मुम्बई को छोड़कर नही जा सकते

क्या सिर्फ इसलिए कि कोरोना संकट बड़ा है और उन्हें डर है कि उस वायरस से उनकी जान चली जायेगी अगर वो मुम्बई में रहे तो–सरकार हर सम्भव कोशिश तो कर ही रही है।

तुम सिर्फ अफवाहों और डर की बली क्यों चढ़ते हो हमेशा

क्यों वो ये भूल गए कि इसी शहर ने उन्हें दो जून की रोटी दी,उनके बच्चों को शिक्षा दी,गांव में खुद का घर बनाने का मौका दिया,-क्या आज एक बीमारी के डर से वो अपनी मुम्बई को अकेला छोड़कर भाग सकते है

अगर वो गाड़ियों में भरकर अपने गांव भाग सकते है तो इसी पैसे से थोड़े और दिन इन्तेजार कर फिर से अपनी रोजी रोटी और कमाई का जरिया मुम्बई में शुरू कर सकते थे–अगर वो ऐसा नही कर पाए तो गलती किसकी है-मुम्बई में अगर वो कमाई करने 1200,1500 किमी दूर अपने गांव आए यहां आए तो क्या ये सोचकर कि अगर मुम्बई पर कोई मुसीबत आएगी तो वो अपना मुंह छिपाकर भाग जाएंगे

अगर भाग रहे है तो भागें,कोई इस बार उन्हें नही रोकेगा,लेकिन ये भी कसम खाकर जाए कि दोबारा लौट कर मुम्बई में नही आएंगे-कोरोना खत्म होने के बाद भी नही-और ढूंढेंगे अपनी रोजी अपने गांव में-अपने कस्बे में-

क्योंकि मुम्बई सिर्फ अच्छे दिनों के लिए नही,अगर अच्छे दिनों में तुम यहाँ कमाना जानते हो तो जब मुम्बई को तकलीफ आई है तो उसे इस तकलीफ आए बाहर निकालना भी तुम्हारी ही जिम्मेदारी है-लेकिन तुम भाग रहे हो,फिर अच्छे दिन का इन्तेजार करते-

लेकिन हम बचे हुए परदेशियों की गुजारिश है-तुम अब लौट के मत आना-मुम्बई की हवा,पानी,जमीन को अब सांस लेने का मौका मिलेगा-वैसे भी जरूरत आए ज्यादा भीड़ हो गई थी इस शहर में।

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