विधानसभा का बजट सत्र बहुत महत्वपूर्ण होता है .राज्यपाल के अभिभाषण से इसका शुभारंभ होता है .बाद में बजट पेश किया जाता है .अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्तावों पर चर्चा होती है.य़ह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए अपनी बता रखने का बेहतर अवसर होता है .सत्ता पक्ष को अपनी उपलब्धियां और भविष्य की कार्ययोजना बताने का मौका मिलता है .दूसरी तरफ विपक्ष सरकार की कमजोरियों पर निशाना बनाता.
इस संबंध में एक परम्परा बन गई है .विपक्ष राज्यपाल के अभिभाषण पर अविश्वास व्यक्त करता है .बजट पर भी परम्परागत रूप में प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती है .सता पक्ष इसकी तारीफों के पुल बाँधता है .विपक्ष इसे आम ज़न किसान गरीब विरोधी घोषित कर देता है. सता और विपक्ष के पाले बदल जाते है ,लेकिन बयान वही रहते है .उत्तर प्रदेश विधान सभा में इस बार द्विदलीय व्यवस्था कायम हुई थी.विपक्ष के नाम पर केवल एक पार्टी ही मजबूत बन कर उभरी थी. कांग्रेस और बसपा का अस्तित्व कसम खाने लायक ही बचा था .य़ह लगा कि सपा मजबूत भूमिका का निर्वाह करेगी. लेकिन बजट सत्र में ही य़ह धारणा निर्मूल साबित हुई.चुनाव के बाद से ही इस पार्टी को अंतरिक्ष विरोध का ही सामना करना पड़ रहा है .इस बात का नकारात्मक और मनोवैज्ञानिक असर भी दिखाई देने लगा है .नेता प्रतिपक्ष को धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर बोलने का भरपूर अवसर मिला .उन्होंने इसका पूरा लाभ उठाया .सत्ता पक्ष ने भी उनको धैर्य के साथ सुना.लेकिन विपक्ष के हमले से सत्ता पक्ष को कोई परेशानी नहीं हुई. विपक्ष के बयान खुद उसकी परेशानी बन गए .कई मुद्दों पर तो विपक्ष को हास्यास्पद स्थिति का सामना करना पड़. इसके लिए विपक्ष खुद ही जिम्मेदार था.अभिव्यक्ति का तरीका और मुद्दे दोनों का उल्टा असर हुआ .शुरुआत नेता प्रतिपक्ष द्वारा उप मुख्यमंत्री पर टिप्पणी से हुई.पहली बार हप..
भप..जैसे शब्द सुनाई दिए .उप मुख्यमंत्री के दिवंगत पिता का भी उल्लेख किया गया.इसके बाद पर्फ्यूम गोबर संयन्त्र ऑस्ट्रेलिया राहुल गांधी के उल्लेख से भी विपक्ष की छवि पर प्रतिकूल असर हुआ.शायद विपक्ष को य़ह अनुमान नही रहा होगा कि उसके यही मुद्दे चर्चा के विषय बन जाएंगे. य़ह सही है कि विपक्षी नेतृत्व को चुनाव के बाद से ही अंतरिक दबाब का सामना करना पड़ रहा है.इसका असर भी रणनीति पर दिख रहा है. इसके लिए भी नेतृत्व खुद जिम्मेदार है .चुनाव में जिनका सहयोग लिया गया, जिनके साथ सम्मानजनक व्यवहार का वादा किया, उनकी अवहेलना शुरू हो गई है.शिवपाल यादव ने पहले ही नाराजगी व्यक्त कर दी थी. ओमप्रकाश राजभर भी नसीहत दे रहे है .वह अपने पुत्र को विधान परिषद में भेजना चाहते थे .अखिलेश ने उन्हें निराश किया है .पार्टी को अपने पुराने समीकरण पर ही विश्वास है .बिडम्बना य़ह की कपिल सिब्बल और जयन्त चौधरी जैसे नेताओं पर विश्वास किया गया .लेकिन ये लोग कब तक विश्वास पर कायम रहेंगे ,इसकी कोई गारन्टी नहीं है .लग रहा है कि पार्टी ने आजम खान शिवपाल यादव ओम प्रकाश राज्यभर सहित अनेक नेताओ से दूरी रखने का निर्णय ले लिया है.इसमे कई प्रसंग विधानसभा अधिवेशन के समय ही सामने आ गए थे.इसका भी दबाब रहा होगा .सत्ता पक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के भाषण में व्यवधान नहीं किया. जबकि नेता प्रतिपक्ष ही केशव प्रसाद के भाषण में ही व्यवधान पैदा कर रहे थे .य़ह सब असहज था .ऐसा लगा कि विपक्ष ने अपनी पराजय को अभी तक सहजता से शिरोधार्य नहीं किया है .इसलिए सदन में य़ह कहा गया कि दिल्ली वालों ने आकर चुनाव जीतवा दिया .कुंठा और क्रोध का यह भी कारण था .इसलिए विपक्ष के प्रहार तर्कसंगत नहीं थे .कहा गया कि पांच वर्षो में बिजली अपूर्ति बढ़िया थी तो बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा को क्यों हटाया गया .य़ह पार्टी के संगठन का विषय था .श्री कांत शर्मा ने सही जबाब दिया .कहा कि सापा के समय तीन चार जिलों में बिजली आती थी.भाजपा के समय बिना भेदभाव के बिजली अपूर्ति सुनिश्चित की गई. जाहिर है कि विपक्ष ने बिजली का मुद्दा उठाकर अपनी ही  भद्द करा ली .वैसे य़ह सब मुद्दे चुनाव के समय खूब उठे थे .इसका विपक्ष को नुकसान भी हुआ.ऐसे मुद्दों को फिर से उठाना अजीब लगता है . वर्तमान समय में जो समस्याएं है उन पर चर्चा से विपक्ष को अधिक लाभ मिलने की संभावना हो सकती है। बशर्ते वह तथ्यों के आधार पर अपनी बात सदन में रखे। हंगामे में यह सभी बातें सदन के पटल पर नहीं पहुंचती है। इसका यह भी सन्देश जाता है कि विपक्ष के पास तर्क व तथ्यों का अभाव है। अनुचित आचरण से विपक्ष की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ती है। सदन के नेता योगी आदित्यनाथ ने ठीक कहा कहा कि जनप्रतिनिधि.जनता के प्रति अपने सम्बोधन से सम्मोहन पैदा करते हैं, उसी से जनता का समर्थन मिलता है। सदन में होेने वाली गम्भीर चर्चा सदस्यों को सम्मान का प्रतीक बनाती है। विपक्ष अपनी सरकार की उपलब्धियों को इस तरह व्यक्त करता है ,जैसे य़ह य़ह उसकी धरोहर है .लोक भवन में मुख्यमंत्री का कार्यालय है .कहा गया कि योगी आदित्यनाथ हमारे बनाय कार्यालय में बैठ रहे है .फिर कहा गया कि योगी आदित्यनाथ ने हमारे बनाय स्टेडियम में शपथ ग्रहण की है .इस संदर्भ में देखें तो केशव प्रसाद मौर्य का बयान सही लगेगा.उप मुख्यमंत्री ने कहा था कि नेता प्रतिपक्ष को सत्ता में न होने का दर्द सता रहा है। भविष्य में सपा को सत्ता में आने की संभावना भी नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष अपने पांच साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते थकते नहीं हैं. यह आपको कौन सा रोग है . अगर कोई रोग है तो मैं कहूंगा कि आप जांच करा लीजिए. हर योजना पर समाजवादी पार्टी का स्टिकर चस्पा करने के इस रोग से अब मुक्त हो जाइए. नेता प्रतिपक्ष बार बार सड़क और इकलौते एक्सप्रेस-वे बनवाने की बात करते हैं तो क्या इन्होंने सैफई की जमीन बेचकर सड़क बनवाई थी। केशव के ऐसा बोलते ही सपा मुखिया बौखला गए.उन्होंने कहा कि क्या तुम अपने पिताजी से पैसा लाकर सड़क बनवा रहे हो और राशन बांट रहे हो। योगी आदित्यनाथ ने सदन के सभी सदस्यों को मर्यादा में रहने की नसीहत दी। कहा कि सदन के अंदर असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। सदन की मर्यादा की अपेक्षा केवल सत्ता पक्ष से ही नहीं करनी चाहिए. विपक्ष को भी उसका अनुपालन करना आवश्यक है। सदन में जब उप मुख्यमंत्री बोल रहे हों तो बीच में टोका-टोकी उचित नहीं है। बहुत सारी बातें नेता प्रतिपक्ष की भी गलत हो सकती थी लेकिन हमने सुना. हमें जो स्वीकार करना होगा उसे करेंगे और उसका जवाब भी देंगे लेकिन बीच में इस तरह की उत्तेजना दिखाना उचित नहीँ है.

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सकारत्मक छवि कायम हुई है .पहले विकास विकास कुछ खास क्षेत्रो तक सीमित रहता था .उन्हीं क्षेत्रो में बिजली पर्याप्त बिजली अपूर्ति होती थी .कानून व्यवस्था दुरुस्त नहीँ थी .उद्योग की द्रष्टि से महत्वपूर्ण इलाक़ों में बिजली का संकट रहता था .व्यापार सुगमता में उत्तर प्रदेश बहुत पिछड़ा था.इसलिए निवेशकों की यहां कोई रुचि नहीं थी .योगी सरकार ने व्यवस्था में सकारत्मक बदलाव किया .प्रदेश में विकास के कीर्तिमान कायम हुए. अखिलेश यादव सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट के आकार से लगभग दोगुना बजट इस सरकार का है .अखिलेश सरकार के नई विकास योजनाओं के प्रस्ताव से तीन गुना अधिक है। विधानसभा में अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाये थे। कहा कि बेसिक स्कूल का दौरा किया था। उन्होंने एक बच्चे से पूछा कि मुझे पहचानते हो.उस बच्चे ने कहा, हां आप राहुल गांधी हैं।
अखिलेश का कहना था कि शिक्षा के स्तर में अब तक कोई फर्क नहीं आया है। इस बात का जबाब योगी आदित्यनाथ ने दिया .बच्चे मन के सच्चे होते है .उस बच्चे ने गलत नही कहा .राहुल और अखिलेश में ज्यादा फर्क नहीं है . राहुल गांधी देश के बाहर देश की बुराई करते हैं और अखिलेश प्रदेश के बाहर उत्तर प्रदेश की बुराई करते हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव ने कन्नौज में गोबर संयन्त्र लगाने की जगह परफ्यूम संयन्त्र लगाने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि वह आस्ट्रेलिया में पढ़े है .अच्छा सीख कर आए है.इसलिए परफ्यूम संयन्त्र की बात की .सत्ता मैं बैठे लोग गोबर की बात करते है .इस कथन ने फिर सत्ता पक्ष को मौका दिया .योगी ने कहा कि किसान की बात करने वाले नेता प्रतिपक्ष को गोबर से दुर्गंध आती है।उन्होने प्रदेश की वर्तमान स्थिति के लिए पूर्व सरकारों पर निशाना साधा। कहा कि समाजवादी पार्टी को चार बार सत्ता में रहने का मौका मिला। बहुजन समाज पार्टी भी सत्ता में रही। कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही। भाजपा को भी चौथी बार सत्ता में रहने का अवसर मिला है। सभी पार्टियों ने अपने-अपने समय में प्रदेश के विकास के लिए कुछ न कुछ नया किया। परिणाम क्या आया. परिणाम वही ला सकता है, जो समस्या पर कम और समाधान पर ज्यादा जोर देगा। वर्तमान सरकार समस्या का समाधान कर रहीं है .

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